Chhath Puja

Chhath Puja 2024: छठ पूजा प्रकृति को समर्पित पर्व है जिसमें सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा होती है। यह पर्व तीन दिनों तक चलता है जिसका आरंभ चतुर्थी तिथि से हो जाता है और समापन सप्तमी तिथि पर होता है। छठ पर्व पर व्रती कमर तक जल में प्रवेश कर सूर्यदेव को अर्घ्य देते है। आइए जानते हैं छठ पर्व की हर छोटी बड़ी बातें और मान्यताएं। क्यों, कब और कैसे मनाते हैं छठ पर्व।

छठ महापर्व पर बाजारों में शुरू हुई भारी भीड़- 

तीन दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत के लिए दिल्ली के बाजारों में रौनक देखते ही बन रही है। कहीं, लोग छठ के लिए कपड़े से लेकर दउरा खरीद रहे हैं तो कहीं, सूप, मिट्टी व कांसे के बर्तन के साथ ही टोकरी और फल खरीदते हुए लोग आसानी से देखे जा सकते हैं।

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मध्य दिल्ली के पहाड़गंज से लेकर पटेल नगर, गोल मार्केट में जबकि दक्षिणी दिल्ली के ओखला, खानपुर, बदरपुर के बाजारों में छठ महापर्व को लेकर व्रतियों व उनके परिजनों ने सोमवार को जमकर खरीदारी की। लोग कपड़े से लेकर दउरा, सूप, मिट्टी व कांसे के बर्तन, फल सहित पूजन सामग्री की खरीदारी करते नजर आए।

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सामान्य आकार के सूप की कीमत 90 रुपये

बीते वर्ष के मुकाबले छठ पूजा के सामानों के दाम में 15 से 25 रुपये अतिरिक्त थे। छोटे सूप के दाम जहां 40 रुपये थे, वहीं सामान्य आकार के सूप 90 रुपये में मिल रहे थे। पूजा के फलों में शामिल चकोतरा के भाव भी चढ़े नजर आए। सामान्य दिनों में 10 से 20 रुपये में मिलने वाला चकोतरे का दाम 40 रुपये रहा।Creative Blogger,

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पांच नवंबर को नहाय-खाय से अनुष्ठान की हुई शुरुआत चार दिवसीय छठ पर्व की शुरुआत मंगलवार को नहाय-खाय के साथ हुई। वहीं आठ नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इसका समापन होगा। छठ महापर्व को लेकर पांच नवंबर को नहाय-खाय से अनुष्ठान की शुरुआत हुई।

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व्रती सुबह स्नान-ध्यान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर उनसे शक्ति की कामना किये। इसके बाद घरों में पूजा-अर्चना कर कद्दू की सब्जी, अरवा चावल का भात व चना दाल तैयार हुआ। इसे भगवान को अर्पित करने के बाद स्वयं ग्रहण किया, फिर प्रसाद स्वरूप वितरित भी किया गया। दूसरे दिन यानी छह नवंबर को खरना अनुष्ठान होगा। दिन भर उपवास रह कर सूर्यास्त के बाद व्रती भगवान की पूजा-अर्चना कर गुड़ की खीर, रोटी, केला का नैवेद्य देने के बाद स्वयं इसे ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होगा। वहीं तीसरे दिन यानी सात नवंबर को व्रती छठ घाट पर अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य देंगे।


प्रसाद वितरण के बाद व्रती घर आकर करेंगे पारण 

इससे पूर्व प्रात: स्नान-ध्यान के बाद प्रसाद  बनाने की तैयारी शुरू करेंगे। दोपहर तक प्रसाद तैयार कर डाला भरेंगे। इसके बाद परिजनों व सगे-संबंधियों के साथ लोकगीत गाते हुए छठ घाट पहुंचेंगे।

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यमुना में स्नान के बाद सूर्य भगवान को दीपक दिखाती हुई एक महिला।

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आठ नवंबर को उदयाचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के बाद हवन कर सबके लिए मंगलकामना करेंगे। प्रसाद वितरण के बाद व्रती घर आकर पारण करेंगे। छठ पर्व पर होगा रेड कारपेट पर स्वागत छठ को लेकर तैयारियां जोरों से चल रही है।

घाटों को साफ करने के साथ ही उसके आस पर स्वच्छता और सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। छठ समितियां तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। कई स्थानों पर छठ के लिए बनाए जा रहे कृत्रिम घाटों पर व्रतियों का स्वागत रेड कारपेट पर होगा।

घाट के प्रवेश द्वार से लेकर कृत्रिम घाट तक रेड कारपेट बिछाई जाएगी। राजधानी नागरिक कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रीतम धारीवाल ने बताया कि छठ की तैयारी चल रही है। हम व्रतियों के स्वागत के लिए रेड कारपेट बिछाएंगे।Creative Blogger,